Tuesday, 13 December 2016

कुत्ते हैं तो 'कुत्ते की मौत'मारे ही जाएंगे

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इन दिनों----
भौं...भौं...भौं...। भौं...भौं...भौं...। भौं...भौं...भौं...। चीतानुमा कुत्ते को देखकर दूरदर्शी कई कदम पीछे हट गया। मित्र ने कुत्ते को डाटा-'टाइगर...टाइगर...ये कोई चोर डाकू नहीं..।'
पल भर बाद मित्र हमारी ओर मुखातिब हुआ और कहा, 'लगता है तुम कुत्ते से बहुत डरते हो?'
हमने जवाब दिया, 'कुत्तों से नहीं, आदमी की शक्ल में कुत्ते से डरता हूं। कोई-कोई आदमी कुत्तों से भी बदतर होता है, जिनके काटे की कोई दवा ही नहीं मिलती...।'
चाय के दौरान मित्र ने अपने पालतू कुत्ते का 'गुणगान'
शुरू किया तो दूरदर्शी को लगा कि 'टाइगर' वाकई उच्चवर्गीय कुत्ता है। इसीलिए वह भौंककर ठसक दिखाता है। मुझे हिकारत की नजर से देखता है। 
गली के कुत्ते भौंककर मोहल्ले भर के लोगों को सजग करते हैं। आसन्न संकट से अलर्ट करते हैं। घूरे पर पड़े अन्न खाते हैं...। 
पट्टे और जंजीर वाला कुत्ता मालिकिनों के साथ बेड और सोफे पर आराम फरमाता है। कार की खिड़कियों से मुंह निकालकर सड़कछाप कुत्तों को चिढ़ाता है। इंटरनेट पर आशिकी करता है...। अपने शहर में इनके लिए बिस्कुट से लेकर गर्भनिरोधक गोलियां तक बिकती हैं। कुत्तों का सम्मान बढ़ता जा रहा है और आदमी की मर्यादा टूटती जा रही है...। 
कुत्तों के मामले में काशी में उल्टी गंगा बह रही है। यहां आदमी कुत्ते को काटता है तो समाचार नहीं बनता। आदमी कुत्ते को मार दे तो बड़ा समाचार बन जाता है। कुछ रोज पहले पड़ोसी मंगरू चचा मिले तो उनका चेहरा पसीने से भीगा हुआ था। हकलाते बोले, 'दूरदर्शी हमारे रिश्तेदार के घर के सामने सड़क पर कई कुत्ते लाल-नीली बत्तियों वाली गाड़ियों चपेट में आ गए हैं।'
हमने कहा, 'चचा, इसमें आश्चर्य की क्या बात है। कुत्ते हैं तो 'कुत्ते की मौत' मारे ही जाएंगे...। नगर आयुक्त को फोन मिलाइए। वे झटपट कुत्तों का शव हटवा देंगे।' 
दूरदर्शी की सलाह पर मंगरू चचा ने नगर आयुक्त को फोन मिलाया तो हमेशा की तरह बंद मिला। हमने मंगरू चचा से कहा, 'इसमें परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है। नगर आयुक्त जब कमिश्नर और डीएम का फोन नहीं उठाते तो पब्लिक की क्या औकात। अपर नगर आयुक्त को फोन लगाइए, वह जरूर सुनेंगे।'
इत्तेफाक से उनका फोन लग गया। मंगरू चचा ने नमस्कार बंदगी के बाद बताया, 'हुजूर... आपको सूचना देनी थी। शिवपुर बाइपास पुल के पास कई कुत्ते मर गए हैं। प्लीज ! उन्हें उठवा दीजिए।' 
अपर नगर आयुक्त ने नाम पूछा तो मगरू चचा ने कहा, 'मौत का मामला है सर...। आपको अपना नाम नहीं बता सकता। बाद में आप यह पूछ सकते हैं कि मौत आई कैसे? खामख्वाह पूछताछ के चक्कर में नहीं पड़ना। सिर्फ इतना जान लीजिए कि कुत्तों को लाल-नीली बत्तियों वाली गाड़ी ने कुचला है। सड़क पर लाश पड़ी है। जल्द उठवाइए, अन्यथा बदबू से लोगों का जीना दूभर हो जाएगा।' 
अपर नगर आयुक्त ने मंगरू चचा को आश्वासन की घुट्टी पिला दी। दो दिन तक कुत्तों की लाश नहीं उठी तो दुर्गंध से इलाके के लोगों की हालत खराब हो गई। रिश्तेदार के उलाहना देने पर मंगरू चचा फिर घर आए और कहा, 'दूरदर्शी अब तुम ही कुछ करो। नगर निगम वाले सुनते ही नहीं।'
घंटों रियाज करने के बाद दूरदर्शी नगर आयुक्त से संपर्क करने में कामयाब हो गया। 
नगर आयुक्त ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा, 'दूरदर्शी आप इत्ती सी बात के लिए परेशान हो रहे हैं? ' 
हमने कहा, 'सर, बड़ा अनर्थ हुआ है। बनारस में कुत्तों का मरना बड़ा अशुभ होता है। आप जानते नहीं, काशी के कोतवाल बाबा कालभैरव कुत्तों की सवारी करते हैं। शहर के हर गली-हर चौराहे पर इनकी पंचायत बैठती है। देखते नहीं, कबीरचौरा अस्पताल में एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगवाने के लिए लोगों को कितनी धक्का-मुक्की झेलनी पड़ती है। पितरों की तरह कुत्तों के शवों का अंतिम संस्कार ठीक करा दीजिए, अन्यथा उनकी आत्मा लोगों का जीना दूभर कर सकती है।'
दूरदर्शी के आग्रह पर नगर आयुक्त ने फौरन अपर नगर आयुक्त को कुत्तों के अंतिम संस्कार कराने की व्यवस्था करने का हुक्म दिया। अपर नगर आयुक्त ने उप नगर आयुक्त और उप नगर आयुक्त ने जोनल अधिकारी को तथा जोनल अधिकारी ने सफाई निरीक्षक को 'साहब' का हुक्म पालन करने का आदेश दिया। इस बीच दो दिन और बीत गए। कुत्तों की लाश की दुर्गंध इलाके भर में फैल गई...। 
लोग हाय-तौबा करने लगे तो दूरदर्शी मगरू चचा के साथ सफाई चौकी पहुंचा। उलाहना देने पर सफाई निरीक्षक ने तंज कसा, 'शहर भर के सफाई कर्मचारी पक्के महाल में आईएलएफएस संस्था के सहयोग के लिए भेज दिए गए हैं। जो बचे हैं वे नगर आयुक्त और मेयर के घर पर ड्यूटी बजा रहे हैं। काशी में कुत्ते तो रोज ही मरते हैं। हम कूड़े के पहाड़ नहीं उठा पा रहे हैं तो कुत्तों का शव कैसे उठवा पाएंगे? सफाई कर्मचारियों की तैनाती के लिए नोटशीट बनाकर ऊपर भेजूंगा। मिलेंगे तो सफाई कराऊंगा। जाइए, पहले कुत्तों के मरने की एफआईआर पुलिस थाने में दर्ज कराइए।' 
मंगरू चचा के साथ दूरदर्शी शिवपुर पुलिस थाने पर पहुंचा तो मुंशी ने टका सा जवाब दे दिया। कहा, 'जब आदमी के मरने पर हम रपट नहीं लिखते तो कुत्तों के मरने पर कैसे लिख लें। पहले जांच कराएंगे...।' 
दो दिन बाद थाने के सिपाही मौके पर पहुंचे और इलाके के लोगों को बुलाकर हड़काने लगे। इतनी बड़ी घटना की सूचना हमें क्यों नहीं दी गई? कुत्ते किस रंग के थे और किसके थे...वगैरह-वगैरह...? 
सिपाहियों की पूछताछ के तरीके पर दूरदर्शी को नहीं रहा गया। कहा, 'कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कुत्तों का शव जल्द उठवाइए, अन्यथा चक्काजाम होगा। नारेबाजी होगी...।' 
' अभी देखते हैं... ' कहकर सिपाही चले गए और फिर लौटे ही नहीं।
कई दिन गुजर गए और कुत्तों के शव नहीं उठे। काफी जोर-आजमाइश के बाद सफाईकर्मी मौके पर पहुंचे तो कुत्तों का शव नदारद था। सिर्फ हड्डियों का ढांचा बचा था, जिसे उठाने से उन्होंने इनकार कर दिया। उनका तर्क था कि हड्डियों के ठेकेदार को पकड़िए, वही उठाएगा। सड़क पर आज भी कुत्तों का अस्थि-पंजर पड़ा है। महीनों हो गए। फिलहाल हड्डियों के ठेकेदार का इंतजार हो रहा है...। 
और अंत में...
जिंदगी की हर उलझनें नई लगती हैं, जख्म भी नया लगता है।
बहुत जालिम हैं ये हाकिम, घर से निकलो तो पता लगता है।। 
0 दूरदर्शी

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