राजदरी-देवदरी जलप्रपात में बसता है जन्नत
0 प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है नौगढ़ के चंद्रप्रभा का नैसर्गिग सौंदर्य
दीवाना बनाता है झरना ---
तिलिस्मी उपन्यास चंद्रकांता के नौगढ़ के गढ़ में है यह मनोरम स्थल
यूपी के सासे सुंदरतम स्थल को हासिल है दूसरे कश्मीर का खिताब
विंध्य पर्वत की वादियों में जो आता है यहीं का होकर रह जाता है
विजय विनीत
चंदौली के राजदरी-देवदरी जल प्रपात में जन्नत बसता है। काशी नरेश की राजधानी चकिया
(चंदौली) में है यह रमणीय स्थल। मनमोहक पहाड़ी श्रृंखला। चौतरफा हरियाली। काफी ऊंचाई
से गिरती शीतल जलधारा। पक्षियों की चहचहाहट, जंगली जीवों के पदचाप से गुलजार रहने
वाला यह स्थल रोम-रोम को पुलकित कर देता है। हवाओं की बयार, झरनों की फुहार न सिर्फ मन को सुकून
देती है, बल्कि
सैलानियों को रोमांचित भी करती
है। यूपी के इस सासे सुंदरतम स्थल को हासिल है दूसरे कश्मीर का खिताब राजदरी-देवदरी
में बारिश के दिनों में सैलानियों का सैलाब उमड़ रहा है।
प्रकृति की अद्भुत छटा चकिया-नौगढ़ मार्ग के करीब चंद्रप्रभा वन्यजीव
विहार की सीमा से करीा दो किमी दूर है। तिलस्मी उपन्यास चंद्रकांता के जिस नौगढ़ को
पूरी दुनिया जानती है उसी की मनोरम वादियों में है राजदरी-देवदरी जलप्रपात। घने जंगलों
और पहाड़ों की मनोरम वादियां न सिर्फ सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं,
बल्कि वहां पहुंचने
वाले सैलानियों को सुकून देती हैं। महंगे टिकट और कुव्यवस्था के बावजूद जल प्रपात की
खूबसूरत वादियां सैलानियों को अपनी ओर खींचती है। बारिश सीजन में सैकड़ों लोग रोजाना
यहां पहुंचते हैं और इस रमणीय स्थल का लुत्फ उठाते हैं। जल प्रपात की जलधारा में स्रान
भी करते हैं। जल की शीतलता के आगे सैलानियों
की मुश्किलें काफूर हो जाती हैं।
चंद्रप्रभा नदी के राजदरी जल प्रपात का सौंदर्य और शीतलता का एहसास कराने वाला पानी सैकड़ों फीट नीचे खाईं
में गिरता है तो मनोरम दृश्य मन मोह लेता है। यहां चीतल, खरगोस, लंगूर, बंदर और सांपों को
विचरण करते हुए देखा जा सकता है। राजदरी में आनने वाला पानी ऊंची पहाड़ी से झरने से
गिरता है तो मन मोह लेता है। पानी की ओस सरीखी बूंदे बादलों की छटा विखेरती रहती हैं।
यहां आने वाले सैलानी जल प्रपात के दूसरे छोर तक पत्थर फेंकते हैं। हवाओं के बयार के
बीच पत्थर फेंकने का रोमांच पूरी थकान को मिटा देती है। राजदरी से एक किमी दूर है देवदरी
जल प्रपात। राजदरी जल प्रपात के पास तीन गेस्ट हाउस हैं। इन गेस्ट हाउसों में सैलानी
नहीं, आमतौर
पर अफसर और नेता ही ठहरते हैं। घने जंगलों के बीच लगे बीएसएनएल के मोबाइल टावर सैलानियों
को परेशान करता है। लुंज-पुंज व्यवस्था के चलते आमतौर पर नेटवर्क गाया रहता है। झरने
में कोई फंस जाए तो अफसरों को सूचना देने और पर्यटकों को सचेत करने का कोई पुख्ता इंतजाम
नहीं है।
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